अलीगढ़ 13 अप्रैल 2026। मौसम बदलते ही सर्दी, खांसी और जुकाम होना आम बात है, लेकिन ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना एक खतरनाक आदत बनती जा रही है। कई लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय घर में बची पुरानी दवाइयों का इस्तेमाल कर लेते हैं या मेडिकल स्टोर से सीधे एंटीबायोटिक खरीद लेते हैं, जो कि सेहत के लिए गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। यह समझना बेहद जरूरी है कि ज्यादातर सर्दी-जुकाम और खांसी वायरस के कारण होते हैं, जबकि एंटीबायोटिक दवाइयां केवल बैक्टीरिया पर असर करती हैं, इसलिए इनका सेवन न तो बीमारी को जल्दी ठीक करता है और न ही लक्षणों में राहत देता है।
बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस विकसित हो सकता है, जिसमें बैक्टीरिया इतने मजबूत हो जाते हैं कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर दवाइयां असर करना बंद कर देती हैं, जिससे ‘सुपरबग’ जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है। इसके अलावा, एंटीबायोटिक हमारे शरीर के अच्छे बैक्टीरिया को भी नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे डायरिया, बदहजमी और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से एलर्जी, त्वचा पर रैशेज, खुजली या सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं।
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के रेस्पिरेटरी मेडिसिन एंड पल्मोनोलॉजी विभाग के डायरेक्टर एंड हेड डॉ. आशीष जैन ने बताया “हल्के सर्दी-जुकाम में पर्याप्त आराम करना, गुनगुना पानी पीना, भाप लेना और नमक के पानी से गरारे करना जैसे घरेलू उपाय काफी असरदार होते हैं। आमतौर पर साधारण जुकाम 7 से 10 दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन अगर 4-5 दिनों में सुधार न दिखे या तेज बुखार हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कुछ ऐसे ‘रेड फ्लैग’ लक्षण भी होते हैं, जो यह संकेत देते हैं कि संक्रमण सामान्य नहीं है और बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो सकता है, जैसे 101.3°F (38.5°C) से अधिक बुखार का 3 दिनों से ज्यादा बने रहना, पहले सुधार के बाद लक्षणों का दोबारा और ज्यादा गंभीर रूप में लौटना, सांस लेने में तकलीफ, छाती में जकड़न या घरघराहट, 3 हफ्ते से अधिक समय तक चलने वाली खांसी, गले में तेज दर्द या टॉन्सिल पर सफेद/पीले धब्बे, तथा गाढ़ा हरा या पीला बलगम आना या साइनस में तेज दबाव महसूस होना।“
बच्चों के मामले में विशेष सतर्कता की जरूरत होती है, क्योंकि उनमें संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है। अगर 12 हफ्ते से छोटे शिशु को 100.4°F (38°C) या उससे अधिक बुखार हो, बच्चा सुस्त हो जाए, सामान्य गतिविधियों में रुचि न ले, बहुत ज्यादा सोए, सांस लेने में परेशानी हो या पसलियां धंसती दिखाई दें, बहुत तेजी से सांस ले, दूध या पानी पीना छोड़ दे या शरीर पर रैशेज नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
समग्र रूप से, सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य समस्याओं में खुद से एंटीबायोटिक लेना एक गलत और जोखिम भरा कदम है। सही तरीका यही है कि दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही ली जाए। थोड़ी सी लापरवाही भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है, इसलिए जागरूक रहना और सही समय पर उचित इलाज लेना बेहद जरूरी है।

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