कानपुर 23 मार्च 2026। कैंसर किस तरह मरीज और उनके परिवारों की जिंदगी को प्रभावित करता है लेकिन यदि कैंसर का समय रहते पता चल जाए और इलाज शुरू हो जाए, तो इसके परिणाम बेहद बेहतर हो सकते हैं। इसी कारण कैंसर स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है। यह एक सरल प्रक्रिया है जो कैंसर को शुरुआती या प्री-कैंसर स्टेज में पहचानने में मदद करती है, जिससे इलाज आसान और ज्यादा प्रभावी हो जाता है। भारत में बढ़ते कैंसर मामलों को देखते हुए समय-समय पर स्क्रीनिंग कराना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. राघुराम के ने बताया “देश में कई तरह के कैंसर की स्क्रीनिंग उपलब्ध है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी के जरिए ब्रेस्ट कैंसर की जांच करानी चाहिए, जिससे बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सके और सामान्य जीवन संभव हो सके। 21 से 65 वर्ष की महिलाओं के लिए पैप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर से बचाव में बेहद कारगर है, जो लगभग 80% मामलों को रोक सकता है, वहीं 9 से 26 वर्ष की उम्र में HPV वैक्सीनेशन भी इससे सुरक्षा देता है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को कोलोरेक्टल कैंसर के लिए स्टूल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट या कोलोनोस्कोपी करानी चाहिए, क्योंकि अब यह कैंसर कम उम्र में भी तेजी से बढ़ रहा है। जो लोग तंबाकू या सुपारी का सेवन करते हैं, उन्हें ओरल कैंसर के लिए नियमित रूप से मुंह की जांच करानी चाहिए। वहीं भारी धूम्रपान करने वाले 55 से 80 वर्ष की उम्र के लोगों को लो-डोज CT स्कैन के जरिए लंग कैंसर की स्क्रीनिंग करानी चाहिए।
स्क्रीनिंग हर व्यक्ति के लिए जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका जोखिम अधिक है, जैसे परिवार में कैंसर का इतिहास, जेनेटिक कारण या अनहेल्दी लाइफस्टाइल। ऐसे लोगों को डॉक्टर से सलाह लेकर समय-समय पर जांच जरूर करानी चाहिए, जबकि सामान्य जोखिम वाले लोग भी निर्धारित गाइडलाइन्स का पालन करें। इसके साथ ही अपनी फैमिली हिस्ट्री जानना, डॉक्टर से समय पर सलाह लेना, हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना—जैसे संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइज और तंबाकू से दूरी—बहुत जरूरी है।
कैंसर को लेकर कई मिथक फैले हुए हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि कैंसर कोई डेथ सेंटेंस नहीं है। समय पर जांच और सही इलाज से इसे हराया जा सकता है। स्क्रीनिंग न केवल आसान और किफायती है, बल्कि हर किसी के लिए जरूरी भी है। इसलिए जागरूक रहें, समय पर जांच कराएं और अपनी सेहत की जिम्मेदारी खुद लें, क्योंकि जल्दी पहचान ही जीवन बचाने की कुंजी है।
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